आध्यात्मिक प्रश्नावली

आध्यात्मिक प्रश्नावली

आध्यात्मिक स्तर क्यों जांचें ?

पूर्ण व्यक्तित्व हेतु चार भाग

एक सफल एवं आनंदपूर्ण जीवन जीने हेतु, एक पूर्ण एवं स्वस्थ व्यक्तित्व अत्यावश्यक होता है | आधारभूत संरचना में सर्वमान्य चार मुख्य भाग हैं जो कि "पी.आई.ई.एस. (P. I. E. S.)" के रूप में दर्शाए जाते हैं |

  • शारीरिक भाग (पी. क्यू.) : एक स्वस्थ शरीर
  • बौद्धिक भाग (आई. क्यू.) : तीक्ष्ण बुद्धि
  • भावनात्मक भाग (ई. क्यू.) : गहरी भावनाएं
  • आध्यात्मिक भाग (एस. क्यू.) : सुदृढ़ आध्यात्मिक ज्ञान

शारीरिक क्षमताविहीन व्यक्ति विकलांग है; कम बुद्धि वाला व्यक्ति मानसिक विकलांगता की स्थिति में है; भावनात्मक विकार वाला व्यक्ति एक मनोरोगी है और आध्यात्मिक ज्ञान से रहित व्यक्ति नास्तिक है।

जब किसी व्यक्ति में पी. क्यू., आई. क्यू. या ई. क्यू. अल्प या अविकसित होता है, तो यह एक बीमार, अपंग शरीर और विकृत दिमाग का प्रतीक है, जो कि चिंताजनक स्थिति है | लेकिन जब एस. क्यू. कमजोर होता है, अज्ञानता के कारण यह प्रकृति के कड़े कानूनों या प्रकृति के नियंत्रक (ईश्वर) के नियमों के विरुद्ध जाने के लिए विवश करता है और उस दशा में, परिणाम विनाशकारी होते हैं। देश के कानूनों की अज्ञानता के कारण, एक व्यक्ति उन्हें तोड़ सकता है लेकिन कानून उसे छोड़ता नहीं है। इसी प्रकार, जब कोई व्यक्ति ईश्वर द्वारा संचालित नियमों का उल्लंघन करता है, तो अंतहीन दुखों के इस भौतिक जगत में बार-बार जन्म ग्रहण करने पर विवश करके उसे दंडित किया जाता है। इसलिए, जानवरों के विपरीत, मनुष्यों को आध्यात्मिकता के सिद्धांतों को जानना और उनका पालन अनिवार्य रूप से करना ही चाहिए। आध्यात्मिकता के बिना, मनुष्य कुछ भी नहीं अपितु एक जन्म और मृत्यु के चक्र में फंसा हुवा दो पैर वाला पशु ही है।

आध्यात्मिक भाग क्या है ?

आध्यात्मिक भाग, आध्यात्मिक ज्ञान का मात्रक है जो आपको बताता है कि-

  • मैं कौन हूँ ?
  • इस सृष्टि की रचना का उद्देश्य क्या है ?
  • इस सृष्टि का नियामक कौन है ?
  • मेरा उसके साथ क्या सम्बन्ध है ?
  • मृत्यु क्या है ?
  • पुनर्जन्म क्या है ? इत्यादि...


जब कोई प्रामाणिक स्त्रोत से ज्ञान ग्रहण करके आध्यात्मिक रूप से जागृत हो जाता है तो वह आनंदपूर्ण एवं सफल जीवन व्यतीत करता है | उसका अधूरा व्यक्तित्व परिपूर्ण हो जाता है |

महत्वपूर्ण क्या है ?

प्रत्येक जीवित प्राणी में शरीर और आत्मा के दो आयाम होते हैं। आत्मा हमारे भीतर रूप, सौंदर्य, गतिविधि और शक्ति का कारण है। आत्मा के बिना, शरीर मृत पदार्थ है और यदि बाजार में बेचा जाता है तो आपको मात्र 500/- में रुपये मिल सकता है। जब आत्मा शरीर में मौजूद होती है और उसे चिकित्सकीय परामर्श  की आवश्यकता होती है, तो शरीर और आत्मा को एक साथ रखने के लिए कोई कोई भी व्यक्ति बड़ी मात्रा में खर्च करता है । इसके अतिरिक्त, आध्यात्मिक विज्ञान का ज्ञान जीवन की समस्याओं को सहन करने और समाधान खोजने में सहायक है। केवल मूर्ख ही आत्मा के अस्तित्व को महत्त्व नहीं देते हैं। निस्संदेह, शरीर और आत्मा का ज्ञान एक उत्कृष्ट जीवन के लिए जरूरी है। आध्यात्मिक ज्ञान लेकर निश्चित रूप से प्रत्येक मनुष्य स्वस्थ एसक्यू विकसित कर सकता है जो भौतिक विज्ञान सीखकर संभव नहीं है।

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मैंने नियम एवं शर्तें पढ़ लिए हैं तथा मैं सहमत हूँ |
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